हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 8.85.20

मंडल 8 → सूक्त 85 → श्लोक 20 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 8)

ऋग्वेद: | सूक्त: 85
स वृ॑त्र॒हेन्द्र॑श्चर्षणी॒धृत्तं सु॑ष्टु॒त्या हव्यं॑ हुवेम । स प्रा॑वि॒ता म॒घवा॑ नोऽधिव॒क्ता स वाज॑स्य श्रव॒स्य॑स्य दा॒ता ॥ (२०)
हम शत्रुहंता, मानवपोषक एवं बुलाने योग्य इंद्र को अपनी शोभन स्तुति द्वारा बुलाते हैं. इंद्र हमारे विशेष रक्षक, धनस्वामी, हमारे प्रति सम्मानपूर्वक बोलने वाले एवं अन्न व कीर्ति चाहने वाले हैं. (२०)
We call the enemy, the anthropotrophic and the summoning Indra through our adornment praise. Indra is our special protector, a wealthy protector, a respectful speaker of us and a seeker of food and fame. (20)