हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 8.85.3

मंडल 8 → सूक्त 85 → श्लोक 3 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 8)

ऋग्वेद: | सूक्त: 85
इन्द्र॑स्य॒ वज्र॑ आय॒सो निमि॑श्ल॒ इन्द्र॑स्य बा॒ह्वोर्भूयि॑ष्ठ॒मोजः॑ । शी॒र्षन्निन्द्र॑स्य॒ क्रत॑वो निरे॒क आ॒सन्नेष॑न्त॒ श्रुत्या॑ उपा॒के ॥ (३)
इंद्र का वज्र उनके हाथ में दृढ़तापूर्वक पकड़ा गया है और उनकी भुजाओं में अधिक शक्ति है. युद्ध के लिए चलते समय इंद्र के सिर पर टोप आदि होते हैं एवं उनका आदेश सुनने के लिए लोग समीप पहुंचते हैं. (३)
Indra's thunderbolt is firmly held in his hand and there is more power in his arms. While walking for war, Indra has caps etc. on his head and people come close to listen to his order. (3)