हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 8.88.2

मंडल 8 → सूक्त 88 → श्लोक 2 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 8)

ऋग्वेद: | सूक्त: 88
मत्स्वा॑ सुशिप्र हरिव॒स्तदी॑महे॒ त्वे आ भू॑षन्ति वे॒धसः॑ । तव॒ श्रवां॑स्युप॒मान्यु॒क्थ्या॑ सु॒तेष्वि॑न्द्र गिर्वणः ॥ (२)
हे शोभन साफा वाले, घोड़ों के स्वामी एवं स्तुतियोग्य इंद्र! सेवक तुम्हारे लिए सोमरस निचोड़ते हैं. तुम उसे पीकर प्रसन्न बनो, हम तुमसे यही याचना करते हैं. सोमरस निचुड़ जाने पर तुम्हारे अन्न उपमायोग्य एवं प्रशंसनीय हों. (२)
O Shobhan Safa wale, lord of the horses and praiseworthy Indra! The servants squeeze the somras for you. Be happy to drink it, that's what we beg of you. May your food grains be suitable and admirable when you go to Somers. (2)