ऋग्वेद (मंडल 8)
वेत्य॑ध्व॒र्युः प॒थिभी॒ रजि॑ष्ठैः॒ प्रति॑ ह॒व्यानि॑ वी॒तये॑ । अधा॑ नियुत्व उ॒भय॑स्य नः पिब॒ शुचिं॒ सोमं॒ गवा॑शिरम् ॥ (१०)
हे नियुत नाम अश्चों वाले वायु! अध्वर्यु अतिशय सरल मार्गो से जाता है एवं तुम्हारे खाने के लिए हव्य ले जाता है. तुम हमारे शुद्ध एवं गोदुग्ध आदि से मिश्रित दोनों प्रकार के सोमरस को पिओ. (१०)
O young name, the air with the ashes! Adhwaryu goes the most simple routes and takes the havya for you to eat. You drink both types of somras mixed with our pure and godly etc. (10)