हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 8.90.2

मंडल 8 → सूक्त 90 → श्लोक 2 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 8)

ऋग्वेद: | सूक्त: 90
वर्षि॑ष्ठक्षत्रा उरु॒चक्ष॑सा॒ नरा॒ राजा॑ना दीर्घ॒श्रुत्त॑मा । ता बा॒हुता॒ न दं॒सना॑ रथर्यतः सा॒कं सूर्य॑स्य र॒श्मिभिः॑ ॥ (२)
अत्यंत बढ़े हुए बल वाले, देखने में विशाल, यज्ञकर्म के नेता, दीप्तिशाली व अतिशय विद्वान्‌ वे मित्र व वरुण दोनों भुजाओं के समान सूर्य की किरणों के साथ कर्म करते हैं. (२)
With a very increased force, vast in appearance, the leader of the yagnakarma, the bright and the most learned, they work with the rays of the sun like both the arms of the friend and Varuna. (2)