हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 8.91.18

मंडल 8 → सूक्त 91 → श्लोक 18 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 8)

ऋग्वेद: | सूक्त: 91
प्रचे॑तसं त्वा क॒वेऽग्ने॑ दू॒तं वरे॑ण्यम् । ह॒व्य॒वाहं॒ नि षे॑दिरे ॥ (१८)
हे कवि, उत्तम बुद्धि वाले, वरण करने योग्य, देवों के दूत एवं इव्य वहन करने वाले अग्नि! देवगण तुम्हारे चारों ओर बैठते हैं. (१८)
O poet, of the best of wisdom, worthy of choice, the angels of the gods and the agni that carries the divine! The gods sit around you. (18)