हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 9.105.5

मंडल 9 → सूक्त 105 → श्लोक 5 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 9)

ऋग्वेद: | सूक्त: 105
स नो॑ हरीणां पत॒ इन्दो॑ दे॒वप्स॑रस्तमः । सखे॑व॒ सख्ये॒ नर्यो॑ रु॒चे भ॑व ॥ (५)
हे घोड़ों के स्वामी एवं अतिशय दीप्तिशाली सोम! तुम ऋत्विजों के हितसाधक होकर हमारे लिए दीप्ति वाले बनो. (५)
O lord of horses and the most radiant Som! Be the benefactors of the ritvis and be the ones of the light for us. (5)