हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद (मंडल 9)

ऋग्वेद: | सूक्त: 3
ए॒ष दे॒वो अम॑र्त्यः पर्ण॒वीरि॑व दीयति । अ॒भि द्रोणा॑न्या॒सद॑म् ॥ (१)
ये मरणरहित एवं दीप्तिशाली सोम स्थित होने के लिए कलश की ओर पक्षी के समान जाते हैं. (१)
These go like a bird towards the kalash to be located without death and glistening soma. (1)

ऋग्वेद (मंडल 9)

ऋग्वेद: | सूक्त: 3
ए॒ष दे॒वो वि॒पा कृ॒तोऽति॒ ह्वरां॑सि धावति । पव॑मानो॒ अदा॑भ्यः ॥ (२)
उंगलियों द्वारा निचोड़ा गया सोमरस टपकता हुआ शत्रुओं को मारने के लिए जाता है. सोमरस को कोई पराजित नहीं कर सकता. (२)
The somarus squeezed by the fingers tends to kill the dripping enemies. No one can defeat Someras. (2)

ऋग्वेद (मंडल 9)

ऋग्वेद: | सूक्त: 3
ए॒ष दे॒वो वि॑प॒न्युभिः॒ पव॑मान ऋता॒युभिः॑ । हरि॒र्वाजा॑य मृज्यते ॥ (३)
टपकने वाला दीप्तिशाली सोमरस यज्ञाभिलाषी स्तोताओं द्वारा इस तरह सजाया जाता है, जैसे युद्ध के लिए घोड़े को सजाया जाता है. (३)
The dripping glistening somras is decorated by the sacrificial hymns in such a way as a horse is decorated for battle. (3)

ऋग्वेद (मंडल 9)

ऋग्वेद: | सूक्त: 3
ए॒ष विश्वा॑नि॒ वार्या॒ शूरो॒ यन्नि॑व॒ सत्व॑भिः । पव॑मानः सिषासति ॥ (४)
ये शूर सोम अपनी शक्तियों द्वारा सभी संपत्तियों को लाकर हमें बांटना चाहते हैं. (४)
These Shur Mons want to divide us by bringing all the assets by their powers. (4)

ऋग्वेद (मंडल 9)

ऋग्वेद: | सूक्त: 3
ए॒ष दे॒वो र॑थर्यति॒ पव॑मानो दशस्यति । आ॒विष्कृ॑णोति वग्व॒नुम् ॥ (५)
टपकते हुए सोमदेव हमारे यज्ञ में आने के लिए रथ चाहते हैं, हमारी अभिलाषाएं पूरी करते हैं एवं शब्द प्रकट करते हैं. (५)
Dripping Somdev wants a chariot to come to our yagna, fulfills our desires and expresses words. (5)

ऋग्वेद (मंडल 9)

ऋग्वेद: | सूक्त: 3
ए॒ष विप्रै॑र॒भिष्टु॑तो॒ऽपो दे॒वो वि गा॑हते । दध॒द्रत्ना॑नि दा॒शुषे॑ ॥ (६)
स्तोताओं द्वारा स्तुत ये सोमदेव हव्यदाता यजमान को रत्न देते हुए जलों में प्रवेश करते हैं. (६)
Dressed by hymns, these Somdevs enter the waters by giving gems to the havandata host. (6)

ऋग्वेद (मंडल 9)

ऋग्वेद: | सूक्त: 3
ए॒ष दिवं॒ वि धा॑वति ति॒रो रजां॑सि॒ धार॑या । पव॑मानः॒ कनि॑क्रदत् ॥ (७)
ये टपकने वाले सोम शब्द करते हुए सारे संसार को तिरस्कृत करते हुए स्वर्ग को जाते हैं. (७)
These dripping mons go to heaven despising the whole world while saying the word 'Som'. (7)

ऋग्वेद (मंडल 9)

ऋग्वेद: | सूक्त: 3
ए॒ष दिवं॒ व्यास॑रत्ति॒रो रजां॒स्यस्पृ॑तः । पव॑मानः स्वध्व॒रः ॥ (८)
शोभन यज्ञ वाले एवं अपराजित पवमान सोम सभी लोकों को तिरस्कृत करते हुए स्वर्ग को जाते हैं. (८)
Shobhan Yajnawale and Aparajit Pavman Som goes to heaven despising all the people. (8)
Page 1 of 2Next →