ऋग्वेद (मंडल 9)
ए॒ष दे॒वो अम॑र्त्यः पर्ण॒वीरि॑व दीयति । अ॒भि द्रोणा॑न्या॒सद॑म् ॥ (१)
ये मरणरहित एवं दीप्तिशाली सोम स्थित होने के लिए कलश की ओर पक्षी के समान जाते हैं. (१)
These go like a bird towards the kalash to be located without death and glistening soma. (1)