हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 9.39.4

मंडल 9 → सूक्त 39 → श्लोक 4 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 9)

ऋग्वेद: | सूक्त: 39
अ॒यं स यो दि॒वस्परि॑ रघु॒यामा॑ प॒वित्र॒ आ । सिन्धो॑रू॒र्मा व्यक्ष॑रत् ॥ (४)
दशापवित्र पर सींचे जाते हुए सोम पानी की लहरों के रूप में टपकते हैं एवं झुलोक के ऊपर तेज चाल से जाते हैं. (४)
Being sewn on the dashapavittra, the mons drip as waves of water and move at a fast speed over the jhuloka. (4)