हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद (मंडल 9)

ऋग्वेद: | सूक्त: 41
प्र ये गावो॒ न भूर्ण॑यस्त्वे॒षा अ॒यासो॒ अक्र॑मुः । घ्नन्तः॑ कृ॒ष्णामप॒ त्वच॑म् ॥ (१)
निचुड़े हुए, गतिशील, तेज चलने वाले एवं दीप्तिशाली सोम काले चमड़े वाले लोगों को मारते हुए घूमते हैं, तुम उनकी स्तुति करो. (१)
The wretched, moving, fast-moving and radiant Mons walk around killing black-skinned people, you praise them. (1)

ऋग्वेद (मंडल 9)

ऋग्वेद: | सूक्त: 41
सु॒वि॒तस्य॑ मनाम॒हेऽति॒ सेतुं॑ दुरा॒व्य॑म् । सा॒ह्वांसो॒ दस्यु॑मव्र॒तम् ॥ (२)
शोभन-सोम यज्ञ न करने वाले तथा दस्युजनों को पराजित करना चाहते हैं. वे बंधनकारी तथा दुष्टबुद्धि राक्षसों को दबाने की अभिलाषा रखते हैं. हम सोम की इन दोनों इच्छाओं की प्रशंसा करते हैं. (२)
Shobhan-Som wants to defeat those who do not perform yajna and bandits. They desire to suppress bonding and evil-minded monsters. We admire both these wishes of Mon. (2)

ऋग्वेद (मंडल 9)

ऋग्वेद: | सूक्त: 41
श‍ृ॒ण्वे वृ॒ष्टेरि॑व स्व॒नः पव॑मानस्य शु॒ष्मिणः॑ । चर॑न्ति वि॒द्युतो॑ दि॒वि ॥ (३)
सोम का शब्द वर्षा के समान सुनाई देता है तथा निचुड़ते हुए एवं शक्तिशाली सोम की दीप्तियां अंतरिक्ष में चलती हैं. (३)
The word Som sounds like rain and the glow of the destitute and powerful Som moves in space. (3)

ऋग्वेद (मंडल 9)

ऋग्वेद: | सूक्त: 41
आ प॑वस्व म॒हीमिषं॒ गोम॑दिन्दो॒ हिर॑ण्यवत् । अश्वा॑व॒द्वाज॑वत्सु॒तः ॥ (४)
हे सोम! तुम निचुड़कर हमारे सामने गायों, स्वर्ण, घोड़ों और बल से युक्त महान्‌ अन्न लाओ. (४)
Hey Mon! You muster down and bring before us great food with cows, gold, horses and force. (4)

ऋग्वेद (मंडल 9)

ऋग्वेद: | सूक्त: 41
स प॑वस्व विचर्षण॒ आ म॒ही रोद॑सी पृण । उ॒षाः सूर्यो॒ न र॒श्मिभिः॑ ॥ (५)
हे सूर्यदर्शक सोम! तुम नीचे की ओर गिरो एवं उस रस से विस्तृत द्यावा-पृथिवी को इस प्रकार पूर्ण कर दो, जिस प्रकार सूर्य किरणों से दिन को पूर्ण करता है. (५)
O Suryadarshaka Mon! You fall down and complete the wide dyava-earth with that juice in such a way that the sun completes the day with the rays. (5)

ऋग्वेद (मंडल 9)

ऋग्वेद: | सूक्त: 41
परि॑ णः शर्म॒यन्त्या॒ धार॑या सोम वि॒श्वतः॑ । सरा॑ र॒सेव॑ वि॒ष्टप॑म् ॥ (६)
हे सोम! नदियां अपनी धारा से जिस प्रकार भूलोक को पूर्ण करती हैं, उसी प्रकार तुम अपनी सुखकारी धारा के द्वारा हमें चारों ओर से पूर्ण करो. (६)
Hey Mon! Just as rivers complete the bhulok with their stream, so do you complete us from all around with your pleasing stream. (6)