हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 9.41.1

मंडल 9 → सूक्त 41 → श्लोक 1 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 9)

ऋग्वेद: | सूक्त: 41
प्र ये गावो॒ न भूर्ण॑यस्त्वे॒षा अ॒यासो॒ अक्र॑मुः । घ्नन्तः॑ कृ॒ष्णामप॒ त्वच॑म् ॥ (१)
निचुड़े हुए, गतिशील, तेज चलने वाले एवं दीप्तिशाली सोम काले चमड़े वाले लोगों को मारते हुए घूमते हैं, तुम उनकी स्तुति करो. (१)
The wretched, moving, fast-moving and radiant Mons walk around killing black-skinned people, you praise them. (1)