हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 9.41.2

मंडल 9 → सूक्त 41 → श्लोक 2 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 9)

ऋग्वेद: | सूक्त: 41
सु॒वि॒तस्य॑ मनाम॒हेऽति॒ सेतुं॑ दुरा॒व्य॑म् । सा॒ह्वांसो॒ दस्यु॑मव्र॒तम् ॥ (२)
शोभन-सोम यज्ञ न करने वाले तथा दस्युजनों को पराजित करना चाहते हैं. वे बंधनकारी तथा दुष्टबुद्धि राक्षसों को दबाने की अभिलाषा रखते हैं. हम सोम की इन दोनों इच्छाओं की प्रशंसा करते हैं. (२)
Shobhan-Som wants to defeat those who do not perform yajna and bandits. They desire to suppress bonding and evil-minded monsters. We admire both these wishes of Mon. (2)