हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 9.64.16

मंडल 9 → सूक्त 64 → श्लोक 16 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 9)

ऋग्वेद: | सूक्त: 64
प्र हि॑न्वा॒नास॒ इन्द॒वोऽच्छा॑ समु॒द्रमा॒शवः॑ । धि॒या जू॒ता अ॑सृक्षत ॥ (१६)
वेगशाली एवं अंतरिक्ष की ओर प्रेरित सोम उंगलियों से आकृष्ट होकर निर्मित होते हैं. (१६)
The swift and space-driven mons are drawn to the fingers and are formed by the fingers. (16)