ऋग्वेद (मंडल 9)
म॒र्मृ॒जा॒नास॑ आ॒यवो॒ वृथा॑ समु॒द्रमिन्द॑वः । अग्म॑न्नृ॒तस्य॒ योनि॒मा ॥ (१७)
मसले जाते हुए एवं गतिशील सोम बिना कारण ही अंतरिक्ष एवं जलपात्र की ओर जाते हैं. (१७)
The moving and moving mons go towards space and water bodies without any reason. (17)