ऋग्वेद (मंडल 9)
पु॒ना॒न इ॑न्दवेषां॒ पुरु॑हूत॒ जना॑नाम् । प्रि॒यः स॑मु॒द्रमा वि॑श ॥ (२७)
हे बहुतों द्वारा बुलाए गए एवं छनते हुए सोम! तुम इस यज्ञ में स्तोत्र बोलने वाले लोगों के प्यारे बनकर द्रोणकलश में घुसो. (२७)
O Mon, called and sifted by many! You enter dronakalash by becoming the beloved of the people who speak hymns in this yajna. (27)