ऋग्वेद (मंडल 9)
उ॒तो स॒हस्र॑भर्णसं॒ वाचं॑ सोम मख॒स्युव॑म् । पु॒ना॒न इ॑न्द॒वा भ॑र ॥ (२६)
हे दीप्तिशाली एवं छनते हुए सोम! तुम हमें ऐसी वाणी दो, जो हजारों का भरण करने वाली एवं हमें धन देने की अभिलाषा वाली हो. (२६)
O bright and wretched Mon! Give us a voice that is worth thousands and desires to give us money. (26)