हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 9.65.3

मंडल 9 → सूक्त 65 → श्लोक 3 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 9)

ऋग्वेद: | सूक्त: 65
आ प॑वमान सुष्टु॒तिं वृ॒ष्टिं दे॒वेभ्यो॒ दुवः॑ । इ॒षे प॑वस्व सं॒यत॑म् ॥ (३)
हे शुद्ध होते हुए सोम! तुम देवों की शोभा के लिए शोभन स्तुति वाली वर्षा करो एवं अन्न के लिए हमारे पास वर्षा को भेजो. (३)
O you are pure, Mon! You should rain with praise for the glory of the gods and send it to us for food. (3)