हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 9.65.2

मंडल 9 → सूक्त 65 → श्लोक 2 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 9)

ऋग्वेद: | सूक्त: 65
पव॑मान रु॒चारु॑चा दे॒वो दे॒वेभ्य॒स्परि॑ । विश्वा॒ वसू॒न्या वि॑श ॥ (२)
हे दशापवित्र से छनते हुए सोम! तुम अपने संपूर्ण तेज के द्वारा दीप्त होकर देवों के पास से सब धन हमें दो. (२)
O Mon, filtering from Dashapavittra! You are illuminated by your entire glory and give us all the wealth from the gods. (2)