हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 9.65.6

मंडल 9 → सूक्त 65 → श्लोक 6 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 9)

ऋग्वेद: | सूक्त: 65
यद॒द्भिः प॑रिषि॒च्यसे॑ मृ॒ज्यमा॑नो॒ गभ॑स्त्योः । द्रुणा॑ स॒धस्थ॑मश्नुषे ॥ (६)
हे सोम! तुम दोनों हाथों से मसले एवं जल से भिगोए जाते हो. तुम द्रोणपात्र में ठहरकर चमस आदि पात्रों में भरे जाते हो. (६)
Hey Mon! You are soaked with mashed and water with both hands. You stay in the dronapatra and are filled in spoons, etc. containers. (6)