हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 9.86.34

मंडल 9 → सूक्त 86 → श्लोक 34 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 9)

ऋग्वेद: | सूक्त: 86
पव॑मान॒ मह्यर्णो॒ वि धा॑वसि॒ सूरो॒ न चि॒त्रो अव्य॑यानि॒ पव्य॑या । गभ॑स्तिपूतो॒ नृभि॒रद्रि॑भिः सु॒तो म॒हे वाजा॑य॒ धन्या॑य धन्वसि ॥ (३४)
हे पवमान सोम! तुम अधिक रस देते हो. हे सूर्य के समान पूज्य सोम! तुम भेड़ के बालों से बने दशापवित्र पर जाते हो. हे बहुतों द्वारा पवित्र एवं ऋत्विजों द्वारा पत्थरों की सहायता से निचोड़े गए सोम! तुम महान्‌ युद्धों में धनप्राप्ति के लिए जाते हो. (३४)
O Pawman Mon! You give more juice. O Sun-like revered Mon! You go to Dashapavitra made of sheep's hair. O Mon, holy by many and squeezed with the help of stones by the ritwijas! You go to the great wars to gain wealth. (34)