ऋग्वेद (मंडल 9)
ग्र॒न्थिं न वि ष्य॑ ग्रथि॒तं पु॑ना॒न ऋ॒जुं च॑ गा॒तुं वृ॑जि॒नं च॑ सोम । अत्यो॒ न क्र॑दो॒ हरि॒रा सृ॑जा॒नो मर्यो॑ देव धन्व प॒स्त्या॑वान् ॥ (१८)
हे सोम! गांठ के समान पापों से बंधे हुए मुझे तुम पवित्र बनाओ तथा मुझे मार्ग एवं शक्ति दो. हे हरे रंग वाले व दशापवित्र पर रखे जाते हुए सोम! तुम घोड़े के समान शब्द करते हो. शन्रुनाशक एवं घर देने वाले दीप्त सोम! तुम मेरे पास आओ. (१८)
Hey Mon! You sanctify me, bound by sins like a lump, and give me the way and the power. O som, the green ones and kept on dashapavittra! You do the same words as a horse. Bright Mon, who gives the house and the bridegroom! You come to me. (18)