हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 9.97.25

मंडल 9 → सूक्त 97 → श्लोक 25 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 9)

ऋग्वेद: | सूक्त: 97
अर्वा॑ँ इव॒ श्रव॑से सा॒तिमच्छेन्द्र॑स्य वा॒योर॒भि वी॒तिम॑र्ष । स नः॑ स॒हस्रा॑ बृह॒तीरिषो॑ दा॒ भवा॑ सोम द्रविणो॒वित्पु॑ना॒नः ॥ (२५)
हे सोम! तुम हमारे धनलाभ तथा इंद्र व वायु के पीने के लिए घोड़े के समान जल्दी आओ एवं हमें अनेक प्रकार के अधिक अन्न दो. हे शुद्ध होते हुए सोम! तुम हमें धन देने वाले बनो. (२५)
Hey Mon! You come as early as a horse to drink our wealth and our wealth and indra and air and give us many kinds of more food. O you are pure, Mon! You become the giver of us money. (25)