हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 9.97.28

मंडल 9 → सूक्त 97 → श्लोक 28 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 9)

ऋग्वेद: | सूक्त: 97
अश्वो॒ नो क्र॑दो॒ वृष॑भिर्युजा॒नः सिं॒हो न भी॒मो मन॑सो॒ जवी॑यान् । अ॒र्वा॒चीनैः॑ प॒थिभि॒र्ये रजि॑ष्ठा॒ आ प॑वस्व सौमन॒सं न॑ इन्दो ॥ (२८)
हे ऋत्विजों द्वारा मिलाए जाते हुए, सिंह के समान भयंकर व मन से भी अधिक तेज चलने वाले सोम! तुम घोड़े के समान शब्द करते हो. तुम अत्यंत सरल मार्गो द्वारा हमें मन की प्रसन्नता दो. (२८)
O being mixed up by the ritwijas, the fiercest as the lion and the faster than the mind! You do the same words as a horse. You give us the happiness of the mind by the very simple paths. (28)