ऋग्वेद (मंडल 9)
प्र ते॒ धारा॒ मधु॑मतीरसृग्र॒न्वारा॒न्यत्पू॒तो अ॒त्येष्यव्या॑न् । पव॑मान॒ पव॑से॒ धाम॒ गोनां॑ जज्ञा॒नः सूर्य॑मपिन्वो अ॒र्कैः ॥ (३१)
हे सोम! जब तुम भेड़ के बालों से बने दशापवित्र को पार करके जाते हो, तब तुम्हारी मधु वाली धाराएं बनती हैं. हे शुद्ध होते हुए एवं धारक सोम! तुम गाय के दूध की ओर छनते हो और उत्पन्न होते हुए अपने तेज से आदित्य को पूर्ण करते हो. (३१)
Hey Mon! When you cross the dasapovithra made of sheep's hair, streams with your honey form. O pure and holder Mon! You sift towards the cow's milk and complete Aditya with your fastness while being produced. (31)