हरि ॐ

सामवेद (Samved)

सामवेद (अध्याय 11)

सामवेद: | खंड: 7
अग्निं वो वृधन्तमध्वराणां पुरूतमम् । अच्छा नप्त्रे सहस्वते ॥ (१)
हे यजमानो! अग्नि अकूत शक्ति के भंडार हैं. वह बढ़ोतरी करने वाले व श्रेष्ठतम हैं. आप सभी अग्नि के निकट पहुंचिए. (१)
O hosts! Agni is a storehouse of immense power. He is the grower and the best. You all get close to the agni. (1)

सामवेद (अध्याय 11)

सामवेद: | खंड: 7
अयं यथा न आभुवत्त्वष्टा रूपेव तक्ष्या । अस्य क्रत्वा यशस्वतः ॥ (२)
हे यजमानो! त्वष्टा (बढ़ई) जैसे लकड़ी को रूप (आकार) प्रदान करते हैं, तदवत (उसी प्रकार) अग्नि हमें यश और स्वरूप प्रदान करते हैं. (२)
O hosts! Just as tvashta (carpenter) gives form (shape) to wood, tadavat (similarly) agni gives us fame and form. (2)

सामवेद (अध्याय 11)

सामवेद: | खंड: 7
अयं विश्वा अभि श्रियोऽग्निर्देवेषु पत्यते । आ वाजैरुप नो गमत् ॥ (३)
हे अग्नि! आप सभी सुख व देवताओं को भी संरक्षण प्रदान करते हैं. आप अन्नबल के साथ हमारे समीप पधारने की कृपा कीजिए. (३)
O agni! You also provide protection to all happiness and gods. Please come to us with food. (3)

सामवेद (अध्याय 11)

सामवेद: | खंड: 7
इममिन्द्र सुतं पिब ज्येष्ठममर्त्यं मदम् । शुक्रस्य त्वाभ्यक्षरन्धारा ऋतस्य सादने ॥ (४)
हे इंद्र! यज्ञ में सोमरस की मददायी बड़ीबड़ी चमकीली धाराएं झर रही हैं. आप यज्ञ सदन में पधारिए और सोमरस को पीजिए. (४)
O Indra! In the yajna, large bright streams are flowing to the mad of Someras. You come to the Yagya Sadan and drink someras. (4)

सामवेद (अध्याय 11)

सामवेद: | खंड: 7
न किष्ट्वद्रथीतरो हरी यदिन्द्र यच्छसे । न किष्ट्वानु मज्मना न किः स्वश्व आनशे ॥ (५)
हे इंद्र! आप जैसा कोई अन्य वीर है ही नहीं, न ही आप जैसा कोई घोड़ों का पालनहार, न ही घोड़ों का स्वामी, न ही आप जैसा कोई बलवान है. आप घोड़ों से चलने वाले रथ में विराजते हैं. (५)
O Indra! There is no other hero like you, no horse keeper like you, nor the master of horses, nor is there anyone as strong as you. You sit in a horse-driven chariot. (5)

सामवेद (अध्याय 11)

सामवेद: | खंड: 7
इन्द्राय नूनमर्चतोक्थानि च ब्रवीतन । सुता अमत्सुरिन्दवो ज्येष्ठं नमस्यता सहः ॥ (६)
हे यजमानो! आप निश्चित रूप से इंद्र की ही पूजा कीजिए. आप उन के लिए प्रार्थना गाइए. इंद्र देवों में ज्येष्ठ (बड़े) हैं. आप अपने पुत्रों सहित उन्हें नमन कीजिए. (६)
O hosts! You must worship Indra. You sing prayers for them. Indra is the eldest of the gods. You bow down to them along with your sons. (6)

सामवेद (अध्याय 11)

सामवेद: | खंड: 7
इन्द्र जुषस्व प्र वहा याहि शूर हरिह । पिबा सुतस्य मतिर्न मधोश्चकानश्चारुर्मदाय ॥ (७)
हे इंद्र! आप शूरवीर व घोड़ों के स्वामी हैं. आप आइए. आप के पुत्र (यजमान) आप को प्रसन्न करने के लिए सोमरस भेंट कर रहे हैं. आप उस मधुर सोमरस को पीने की कृपा कीजिए. (७)
O Indra! You are a knight and a master of horses. You come. Your son (host) is offering Someras to please you. Please drink that sweet someras. (7)

सामवेद (अध्याय 11)

सामवेद: | खंड: 7
इन्द्र जठरं नव्यं न पृणस्व मधोर्दिवो न । अस्य सुतस्य स्वा३र्नोप त्वा मदाः सुवाचो अस्थुः ॥ (८)
हे इंद्र! आप जैसे अपने दिव्यलोक में अपने पुत्रों की प्रार्थनाओं को सुन कर प्रसन्न होते हैं, वैसे ही आप मधुर दिव्य सोमरस को पी कर प्रसन्न होने की कृपा कीजिए. (८)
O Indra! Just as you are happy to listen to the prayers of your sons in your divine land, please be happy by drinking the sweet divine Someras. (8)
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