सामवेद (अध्याय 11)
इममिन्द्र सुतं पिब ज्येष्ठममर्त्यं मदम् । शुक्रस्य त्वाभ्यक्षरन्धारा ऋतस्य सादने ॥ (४)
हे इंद्र! यज्ञ में सोमरस की मददायी बड़ीबड़ी चमकीली धाराएं झर रही हैं. आप यज्ञ सदन में पधारिए और सोमरस को पीजिए. (४)
O Indra! In the yajna, large bright streams are flowing to the mad of Someras. You come to the Yagya Sadan and drink someras. (4)