हरि ॐ

सामवेद (Samved)

सामवेद 11.7.5

अध्याय 11 → खंड 7 → मंत्र 5 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

सामवेद (अध्याय 11)

सामवेद: | खंड: 7
न किष्ट्वद्रथीतरो हरी यदिन्द्र यच्छसे । न किष्ट्वानु मज्मना न किः स्वश्व आनशे ॥ (५)
हे इंद्र! आप जैसा कोई अन्य वीर है ही नहीं, न ही आप जैसा कोई घोड़ों का पालनहार, न ही घोड़ों का स्वामी, न ही आप जैसा कोई बलवान है. आप घोड़ों से चलने वाले रथ में विराजते हैं. (५)
O Indra! There is no other hero like you, no horse keeper like you, nor the master of horses, nor is there anyone as strong as you. You sit in a horse-driven chariot. (5)