हरि ॐ

सामवेद (Samved)

सामवेद (अध्याय 12)

सामवेद: | खंड: 5
इन्द्रो मदाय वावृधे शवसे वृत्रहा नृभिः । तमिन्महत्स्वाजिषूतिमर्भे हवामहे स वाजेषु प्र नोऽविषत् ॥ (१)
हे इंद्र! आप मददाता व वृत्रनाशक हैं. आप अपने रक्षा साधनों से हमें बलवान बना सकते हैं. हम आप से उन रक्षा साधनों सहित युद्धों में अपनी रक्षा करने का अनुरोध करते हैं. आप हमारी रक्षा करने की कृपा कीजिए. (१)
O Indra! You are a helper and a chronicler. You can make us strong with your defence tools. We request you to defend yourself in wars, including those defence instruments. Please protect us. (1)

सामवेद (अध्याय 12)

सामवेद: | खंड: 5
असि हि वीर सेन्योऽसि भूरि पराददिः । असि दभ्रस्य चिद्वृधो यजमानाय शिक्षसि सुन्वते भूरि ते वसु ॥ (२)
हे इंद्र! आप वीर सैनिक हैं. आप शत्रुओं की समृद्धि (वैभव) का नाश कीजिए. आप धनदाता हैं. आप यजमानों को वैभव प्रदान करने की कृपा कीजिए. (२)
O Indra! You are a brave soldier. You destroy the prosperity (splendour) of enemies. You are a money giver. Please give glory to the hosts. (2)

सामवेद (अध्याय 12)

सामवेद: | खंड: 5
यदुदीरत आजयो धृष्णवे धीयते धनाम् । युङ्क्ष्वा मदच्युता हरी कं हनः कं वसौ दधोऽस्मां इन्द्र वसौ दधः ॥ (३)
हे इंद्र! आप की कृपा से अपार समृद्धि मिलती है. आप अपने रथ में घोड़े जोत कर, किस को मारना है और किस को नहीं, यह सोचते हुए हमें धन प्रदान करने की कृपा कीजिए. (३)
O Indra! Your grace brings immense prosperity. Please give us money by ploughing horses in your chariot, thinking who to kill and who not. (3)

सामवेद (अध्याय 12)

सामवेद: | खंड: 5
स्वादोरित्था विषूवतो मध्वः पिबन्ति गौर्यः । या इन्द्रेण सयावरीर्वृष्णा मदन्ति शोभसे वस्वीरनु स्वराज्यम् ॥ (४)
हे इंद्र! सूर्य की किरणें सुस्वादु और मीठे सोमरस को पीती हैं. सूर्य की ये किरणें आप के पास सुशोभित होती हैं अर्थात्‌ अपने ही राज्य में निवास करती हैं. (४)
O Indra! The sun's rays drink the luscious and sweet somers. These rays of the sun adorn you, that is, reside in your own kingdom. (4)

सामवेद (अध्याय 12)

सामवेद: | खंड: 5
ता अस्य पृशनायुवः सोमँ श्रीणन्ति पृश्नयः । प्रिया इन्द्रस्य धेनवो वज्रँ हिन्वन्ति सायकं वस्वीरनु स्वराज्यम् ॥ (५)
हे इंद्र! सूर्य की बहुरंगी किरणें आप को छूती हैं. ये किरणें आप को प्रिय हैं और ये आप के वज्र को प्रेरित करती हैं. ये इंद्र की गायों कौ भी प्रिय हैं. ये स्वराज्य में ही स्थित रहती हैं. (५)
O Indra! The multi-colored rays of the sun touch you. These rays are dear to you and they inspire your thunderbolt. These indra's cows are also dear to crows. They are located in Swarajya. (5)

सामवेद (अध्याय 12)

सामवेद: | खंड: 5
ता अस्य नमसा सहः सपर्यन्ति प्रचेतसः । व्रतान्यस्य सश्चिरे पुरूणि पूर्वचित्तये वस्वीरनु स्वराज्यम् ॥ (६)
हे इंद्र! सूर्य की किरणें ज्ञानमय हैं. ये आप को नमन करती हैं. ये जाग्रत करने वाली हैं. ये इंद्र को उन के पहले (किए गए) के कार्यो को याद दिलाती हैं. ये किरणें स्वराज्य में ही स्थित रहती हैं. (६)
O Indra! The sun's rays are enlightening. They salute you. They are going to awaken. They remind Indra of his earlier actions. These rays are located in Swarajya. (6)