हरि ॐ

सामवेद (Samved)

सामवेद 12.5.2

अध्याय 12 → खंड 5 → मंत्र 2 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

सामवेद (अध्याय 12)

सामवेद: | खंड: 5
असि हि वीर सेन्योऽसि भूरि पराददिः । असि दभ्रस्य चिद्वृधो यजमानाय शिक्षसि सुन्वते भूरि ते वसु ॥ (२)
हे इंद्र! आप वीर सैनिक हैं. आप शत्रुओं की समृद्धि (वैभव) का नाश कीजिए. आप धनदाता हैं. आप यजमानों को वैभव प्रदान करने की कृपा कीजिए. (२)
O Indra! You are a brave soldier. You destroy the prosperity (splendour) of enemies. You are a money giver. Please give glory to the hosts. (2)