सामवेद (अध्याय 12)
यदुदीरत आजयो धृष्णवे धीयते धनाम् । युङ्क्ष्वा मदच्युता हरी कं हनः कं वसौ दधोऽस्मां इन्द्र वसौ दधः ॥ (३)
हे इंद्र! आप की कृपा से अपार समृद्धि मिलती है. आप अपने रथ में घोड़े जोत कर, किस को मारना है और किस को नहीं, यह सोचते हुए हमें धन प्रदान करने की कृपा कीजिए. (३)
O Indra! Your grace brings immense prosperity. Please give us money by ploughing horses in your chariot, thinking who to kill and who not. (3)