सामवेद (अध्याय 14)
पुरुत्रा हि सदृङ्ङसि दिशो विश्वा अनु प्रभुः । समत्सु त्वा हवामहे ॥ (२)
हे अग्नि! आप सर्वद्रष्टा, दिशापति और हमारे प्रभु हैं. हम युद्ध में आप का आह्वान करते हैं. (२)
O agni! You are the almighty, the direction and our Swami. We call on you in war. (2)