सामवेद (अध्याय 14)
समत्स्वग्निमवसे वाजयन्तो हवामहे । वाजेषु चित्रराधसम् ॥ (३)
हे अग्नि! आप क्षमतावान व अदभुत हैं. हम युद्ध हेतु बल प्राप्ति के लिए आप का आह्वान करते हैं. (३)
O agni! You are capable and amazing. We call upon you to gain force for war. (3)