सामवेद (अध्याय 14)
त्वं न इन्द्रा भर ओजो नृम्णँ शतक्रतो विचर्षणे । आ वीरं पृतनासहम् ॥ (४)
हे इंद्र! आप ओजस्वी, विलक्षण और सैकड़ों कर्म करने वाले हैं. आप पधारिए और हमें वीरपुत्र प्रदान करने की कृपा कीजिए. (४)
O Indra! You are energetic, extraordinary and do hundreds of deeds. Please come and give us the son of Veer. (4)