हरि ॐ

सामवेद (Samved)

सामवेद 14.6.6

अध्याय 14 → खंड 6 → मंत्र 6 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

सामवेद (अध्याय 14)

सामवेद: | खंड: 6
त्वाँ शुष्मिन्पुरुहूत वाजयन्तमुप ब्रुवे सहस्कृत । स नो रास्व सुवीर्यम् ॥ (६)
हे इंद्र! आप सहस्रकर्मा (हजार काम करने वाले) हैं. आप शक्तिमान हैं. आप आह्वान के योग्य हैं. आप हमें शरेष्ठ वीर्यवान बनाने की कृपा कीजिए. (६)
O Indra! You are Sahasrakarma (a thousand workers). You are powerful. You are eligible for the call. Please make us capable of making us very virtuous. (6)