हरि ॐ

सामवेद (Samved)

सामवेद 15.1.7

अध्याय 15 → खंड 1 → मंत्र 7 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

सामवेद (अध्याय 15)

सामवेद: | खंड: 1
मृजन्ति त्वा देश क्षिपो हिन्वन्ति सप्त धीतयः । अनु विप्रा अमादिषुः ॥ (७)
हे सोम! यजमान की दसों अंगुलियां आप को परिमार्जित करती हैं. सात पुरोहित आप को तृप्ति प्रदान करते हैं. हम ब्राह्मण आप का अनुगमन करते हैं. (७)
O Mon! The host's ten fingers scrape you. Seven priests give you satisfaction. We Brahmins follow you. (7)