हरि ॐ

सामवेद (Samved)

सामवेद 15.8.4

अध्याय 15 → खंड 8 → मंत्र 4 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

सामवेद (अध्याय 15)

सामवेद: | खंड: 8
अभी नो वाजसातमँ रयिमर्ष शतस्पृहम् । इन्दो सहस्रभर्णसं तुविद्युम्नं विभासहम् ॥ (४)
हे सोम! आप तेजस्वी हैं. आप हमें सैकड़ों लोगों द्वारा चाहा गया धन प्रदान करने की कृपा कीजिए. आप द्वारा दिए गए धन से हम हजारों लोगों का भरणपोषण करने में समर्थ हो सकें. आप हमें तेजस्वी और यशस्वी बनाने की कृपा कीजिए. (४)
O Mon! You are stunning. Please give us the money desired by hundreds of people. With the money you give, we can be able to sustain thousands of people. Please make us stunning and successful. (4)