हरि ॐ

सामवेद (Samved)

सामवेद 15.9.4

अध्याय 15 → खंड 9 → मंत्र 4 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

सामवेद (अध्याय 15)

सामवेद: | खंड: 9
एन्द्र नो गधि प्रिय सत्राजिदगोह्य । गिरिर्न विश्वतः पृथुः पतिर्दिवः ॥ (४)
हे इंद्र! आप विश्वपालक, पर्वत की भांति विशाल एवं स्वर्गलोक के स्वामी हैं. आप कृपया हमारे यज्ञ (पास) में पधारिए. (४)
O Indra! You are the world leader, huge like a mountain and the swami of heaven. You please come to our yagna (nearby). (4)