हरि ॐ

सामवेद (Samved)

सामवेद 16.8.2

अध्याय 16 → खंड 8 → मंत्र 2 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

सामवेद (अध्याय 16)

सामवेद: | खंड: 8
स मह्ना विश्वा दुरितानि साह्वानग्नि ष्टवे दम आ जातवेदाः । स नो रक्षिषद्दुरितादवद्यादस्मान्गृणत उत नो मघोनः ॥ (२)
हे अग्नि! आप का प्रकाश ज्ञान वाला है. आप उस प्रकाश को फैलाते रहते हैं. आप तेजस्वी हैं और संसार के सभी पापों का नाश करने में समर्थ हैं. आप दुष्कर्म करने से हमें रोकते हैं और हमारी रक्षा करते हैं. आप हमारी आहुतियों को ग्रहण करते हैं. आप हमारे प्रति कल्याण की भावना धारण करते हैं. (२)
O agni! Your light is knowledgeable. You keep spreading that light. You are brilliant and capable of destroying all the sins of the world. You stop us from committing rape and protect us. You accept our sacrifices. You hold a sense of well-being towards us. (2)