सामवेद (अध्याय 17)
अनु हि त्वा सुतँ सोम मदामसि महे समर्यराज्ये । वाजाँ अभि पवमान प्र गाहसे ॥ (१०)
हे सोम! हम आप के अनुगामी, आप के पुत्र और आप की कृपा से सुखपूर्वक निवास करते हैं. हम आप की कृपा और क्षमता से ही कोई कार्य कर पाते है. (१०)
O Mon! We live happily by your followers, your sons and by your grace. We are able to do any work only with your grace and ability. (10)