सामवेद (अध्याय 2)
इन्द्रो अङ्ग महद्भयमभी षदप चुच्यवत् । स हि स्थिरो विचर्षणिः ॥ (७)
हे इंद्र! आप स्थिर हैं. आप सारे संसार को देखने वाले व ज्ञानी हैं. आप शीघ्र ही भय को दूर करने वाले तो हैं ही, साथ ही भय को हमेशा के लिए हटा देते हैं. (७)
O Indra! You are stable. You are the one who sees and knows the whole world. You are soon going to remove fear, as well as remove fear forever. (7)