हरि ॐ

सामवेद (Samved)

सामवेद 21.2.7

अध्याय 21 → खंड 2 → मंत्र 7 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

सामवेद (अध्याय 21)

सामवेद: | खंड: 2
अग्न आ याह्यग्निभिर्होतारं त्वा वृणीमहे । आ त्वामनक्तु प्रयता हविष्मती यजिष्ठं बर्हिरासदे ॥ (७)
हे अग्नि! आप देवों को आमंत्रित करने वाले हैं. आप हमारी स्तुतियां सुनिए. आप अन्य अग्नियों के साथ हमारे यज्ञस्थान पर पधारिए, कुश का आसन ग्रहण कीजिए. हमारी हवि से युक्त आहुतियां स्वीकार करने की कृपा कीजिए. (७)
O agni! You are going to invite the gods. You listen to our praises. You come to our yajnasthan with other agnis, take the seat of Kush. Please accept our commitments. (7)