सामवेद (अध्याय 23)
स नो वृषन्नमुं चरुँ सत्रादावन्नपा वृधि । अस्मभ्यमप्रतिष्कुतः ॥ (५)
हे इंद्र! हमारे द्वारा समर्पित हवि ग्रहण कीजिए. हमारी इच्छाओं को खाली न लौटाएं. आप जल्दी से जल्दी फल देने वाले हैं. (५)
O Indra! Accept the dedicated havi by us. Don't let our desires go blank. You are going to bear fruit as soon as possible. (5)