हरि ॐ

सामवेद (Samved)

सामवेद 23.1.5

अध्याय 23 → खंड 1 → मंत्र 5 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

सामवेद (अध्याय 23)

सामवेद: | खंड: 1
स नो वृषन्नमुं चरुँ सत्रादावन्नपा वृधि । अस्मभ्यमप्रतिष्कुतः ॥ (५)
हे इंद्र! हमारे द्वारा समर्पित हवि ग्रहण कीजिए. हमारी इच्छाओं को खाली न लौटाएं. आप जल्दी से जल्दी फल देने वाले हैं. (५)
O Indra! Accept the dedicated havi by us. Don't let our desires go blank. You are going to bear fruit as soon as possible. (5)