हरि ॐ

सामवेद (Samved)

सामवेद 23.1.6

अध्याय 23 → खंड 1 → मंत्र 6 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

सामवेद (अध्याय 23)

सामवेद: | खंड: 1
बृषा यूथेव वँसगः कृष्टीरियर्त्योजसा । ईशानो अप्रतिष्कुतः ॥ (६)
हे इंद्र! आप बलवान हैं. आप उसी तरह उपासकों की इच्छा पूरी करने जाते हैं, जैसे गायों के झुंड में बैल जाता है. आप ईश्वर हैं. आप हमारे विरोधी नहीं हो सकते. (६)
O Indra! You are strong. You go to fulfill the wishes of worshippers in the same way as a bull goes in a herd of cows. You are God. You can't be our opponent. (6)