सामवेद (अध्याय 25)
अभि प्रियाणि काव्या विश्वा चक्षाणो अर्षति । हरिस्तुञ्जान आयुधा ॥ (८)
हे सोम! आप सर्वप्रिय, सर्वद्रष्टा व हरिताभ हैं. आप शत्रुओं पर आयुधों से प्रहार करते हैं. (८)
O Mon! You are all-loving, all-pervading and haritabh. You attack enemies with armaments. (8)