हरि ॐ

सामवेद (Samved)

सामवेद 25.5.9

अध्याय 25 → खंड 5 → मंत्र 9 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

सामवेद (अध्याय 25)

सामवेद: | खंड: 5
स मर्मृजान आयुभिरिभो राजेव सुव्रतः । श्येनो न वँसु षीदति ॥ (९)
हे सोम! आप श्रेष्ठकर्मा (अच्छे कार्य करने वाले) हैं. यजमान आप को परिष्कृत करते हैं. आप राजा के समान व अच्छे संकल्पो वाले हैं. बाज पक्षी जैसे वेगवान होता है, वैसे ही आप वेगवान हैं. आप बहुत वेग से जल में मिल जाते हैं. (९)
O Mon! You are the best karma (do good work). Host refine you. You are like a king and have good resolutions. As the eagle bird is faster, so you are faster. You get into the water very fast. (9)