सामवेद (अध्याय 5)
पवस्व देव आयुषगिन्द्रं गच्छतु ते मदः । वायुमा रोह धर्मणा ॥ (७)
हे सोम! आप प्रकाशमान हैं. आप छनने के लिए पात्र में पधारिए. आप का आनंददायी रस इंद्र को पहुंचे. आप धारा के रूप में वायु को प्राप्त कीजिए. (७)
O Mon! You are shining. You come to the container for filtering. Your blissful juices reach Indra. You get air in the form of stream. (7)