सामवेद (अध्याय 5)
पवमानो अजीजनद्दिवश्चित्रं न तन्यतुम् । ज्योतिर्वैश्वानरं बृहत् ॥ (८)
सोम पवित्र हुए. उस के बाद उन्होंने स्वर्गलोक से सब को प्रकाशित कर सकने वाली ज्योति (वैश्वानर) को बिजली की तरह चमकाया. (८)
Som was holy. After that, he flashed the light (Vaishvanar) that could illuminate everyone from heaven like lightning. (8)