हरि ॐ

सामवेद (Samved)

सामवेद 9.2.4

अध्याय 9 → खंड 2 → मंत्र 4 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

सामवेद (अध्याय 9)

सामवेद: | खंड: 2
मित्रं वयँ हवामहे वरुणँ सोमपीतये । य जाता पूतदक्षसा ॥ (४)
हम शुद्ध, बलवान और यज्ञस्थल में प्रकट होने वाले मित्र और वरुण देवता का सोमरस पीने के लिए यज्ञ में आह्वान करते हैं. (४)
We call upon the pure, strong and appearing friends and Varuna devta in the yajna place to drink someras in the yagna. (4)