सामवेद (अध्याय 9)
अग्निं दूतं वृणीमहे होतारं विश्ववेदसम् । अस्य यज्ञस्य सुक्रतुम् ॥ (१)
अग्नि सभी धन पास रखने वाले, देवताओं को यज्ञ में बुलाने वाले, यज्ञ को ठीक तरह कराने वाले व देवों को हवि पहुंचाने वाले हैं. हम आप की उपासना करते हैं. (१)
Agni is the one who keeps all the wealth, calls the gods to the yajna, who performs the yajna properly and delivers the blessings to the gods. We worship you. (1)
सामवेद (अध्याय 9)
अग्निमग्निँ हवीमभिः सदा हवन्त विश्पतिम् । हव्यवाहं पुरुप्रियम् ॥ (२)
हे अग्नि! आप प्रजापालक, हविवाहक, सर्वप्रिय, बुलाने योग्य व अनेक नाम वाले हैं. आप हम सब के नेता हैं. हम मंत्रों से आप का आह्वान करते हैं. (२)
O agni! You are a prajapalak, a marriager, an all-loving, callable and of many names. You are the leader of all of us. We invoke you with mantras. (2)
सामवेद (अध्याय 9)
अग्ने देवाँ इहा वह जज्ञानो वृक्तबर्हिषे । असि होता न ईड्यः ॥ (३)
हे अग्नि! आप अरणियों से उत्पन्न होने वाले व देवताओं के दूत हैं. आप आसन फैलाने वाले यजमान के लिए देवताओं को बुला लाइए. आप मददगार और उपासना के योग्य हैं. (३)
O agni! You are born of forests and messengers of gods. You call the gods for the host who spreads the seat. You are helpful and worthy of worship. (3)
सामवेद (अध्याय 9)
मित्रं वयँ हवामहे वरुणँ सोमपीतये । य जाता पूतदक्षसा ॥ (४)
हम शुद्ध, बलवान और यज्ञस्थल में प्रकट होने वाले मित्र और वरुण देवता का सोमरस पीने के लिए यज्ञ में आह्वान करते हैं. (४)
We call upon the pure, strong and appearing friends and Varuna devta in the yajna place to drink someras in the yagna. (4)
सामवेद (अध्याय 9)
ऋतेन यावृतावृधावृतस्य ज्योतिषस्पती । ता मित्रावरुणा हुवे ॥ (५)
मित्र और वरुण देवता यजमान पर दयालु हैं. वे सत्यमार्गियों पर कृपालु हैं. उन प्रकाशमान मित्र और वरुण देवताओं का हम आह्वान करते हैं. (५)
Friends and Varuna devta are kind to the host. They are kind to the truthful. We invoke those bright friends and Varuna gods. (5)
सामवेद (अध्याय 9)
वरुणः प्राविता भुवन्मित्रो विश्वाभिरूतिभिः । करतां नः सुराधसः ॥ (६)
मित्र और वरुण देवता अपने सभी रक्षा साधनों से हमारी रक्षा करें. वे हमारे शरणदाता हैं. वे हमें यशस्वी धन प्रदान करने की कृपा करें. (६)
Friends and Varuna Devta protect us with all their defense means. They are our lenders. May they please give us successful wealth. (6)
सामवेद (अध्याय 9)
इन्द्रमिद्गाथिनो बृहदिन्द्रमर्केभिरर्किणः । इन्द्रं वाणीरनूषत ॥ (७)
साम गाने वाले पुरोहितों ने बृहत्साम गा कर इंद्र की स्तुति की. यजमानों ने भी मंत्र गा कर इंद्र की स्तुति की. शेष बचे हुए लोगों ने भी वाणी से इंद्र की स्तुति की. (७)
The priests who sang sama praised Indra by singing brihatsam, the hosts also praised Indra by singing mantras.
सामवेद (अध्याय 9)
इन्द्र इद्धर्योः सचा सम्मिश्ल आ वचोयुजा । इन्द्रो वज्री हिरण्ययः ॥ (८)
इंद्र वज्रधारी हैं. वे सोने के आभूषणधारी हैं. उन की वाणी सुनते ही हरि नामक घोड़े रथ में जुत जाते हैं. अब वे अपने उन्हीं घोड़ों को एक साथ रथ में जोतने वाले हैं. (८)
Indra is a vajradhari. They are gold jewellers. On hearing his voice, horses named Hari join the chariot. Now they are going to plough their same horses together in the chariot. (8)